Amul Milk Price: हर घर की सुबह एक कप चाय या कॉफी से शुरू होती है और उसमें सबसे अहम चीज होती है दूध। अगर आप भी रोज़ अमूल दूध खरीदते हैं तो यह खबर आपके लिए ज़रूरी है। अक्टूबर 2025 तक अमूल ने अपने दूध के दामों में कुछ बदलाव किए हैं जिनका असर सीधा आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
अमूल दूध के दामों में ताज़ा बदलाव
अमूल इंडिया देश की सबसे बड़ी डेयरी ब्रांड है और इसके दूध के दामों में हर बदलाव पर सबकी नज़र रहती है। हाल ही में जारी रिपोर्ट के मुताबिक अमूल दूध की कीमतों में कुछ राहत देखने को मिली है।
अमूल गोल्ड यानी फुल क्रीम दूध जिसकी कीमत मई 2025 में ₹69 प्रति लीटर थी अब कुछ इलाकों में ₹63 प्रति लीटर तक मिल रही है। बताया जा रहा है कि यह बदलाव जीएसटी दरों में कटौती और स्थानीय स्तर पर दूध उत्पादन बढ़ने के कारण हुआ है।
वहीं अमूल ताज़ा यानी टोंड दूध की कीमत पहले ₹57 प्रति लीटर थी लेकिन अब कई जगहों पर यह ₹52 प्रति लीटर तक बिक रहा है। इससे घर का बजट थोड़ा आसान हो गया है क्योंकि यही दूध सबसे ज़्यादा इस्तेमाल में आता है।
क्यों बदले अमूल दूध के दाम
सरकार ने सितंबर 2025 में डेयरी उत्पादों पर लगने वाले जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया था। इस फैसले के बाद मक्खन, घी, पनीर और दही जैसे उत्पादों के दामों में भी गिरावट आई। अमूल कंपनी ने इस टैक्स कटौती का असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया है जिससे दूध की कीमतों में राहत मिली है।
साथ ही इस साल देश के कई राज्यों में दूध उत्पादन बढ़ा है क्योंकि पशुपालकों को चारे और सब्सिडी में मदद मिली है। यही वजह है कि बाज़ार में दूध की सप्लाई बढ़ी और दाम थोड़ा नीचे आए हैं।
कौन से उत्पाद सस्ते हुए हैं?
अमूल ने केवल दूध ही नहीं बल्कि अन्य डेयरी प्रोडक्ट्स के दामों में भी थोड़ी राहत दी है।
- घी की कीमतों में करीब ₹20 प्रति किलो तक की कमी आई है।
- पनीर और मक्खन जैसे उत्पादों की कीमतों में भी ₹10 से ₹15 तक की गिरावट देखी जा रही है।
- दही और लस्सी जैसे उत्पाद स्थानीय मंडियों में पहले से सस्ते मिल रहे हैं।
आने वाले महीनों में क्या रहेगा असर
त्योहारी सीज़न आने वाला है और इस दौरान दूध की मांग बढ़ जाती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उत्पादन बढ़ा रहा तो दाम स्थिर रह सकते हैं। सरकार भी कोशिश में है कि डेयरी उत्पादों की कीमतें नियंत्रण में रहें ताकि आम जनता को ज़्यादा बोझ ना उठाना पड़े।
अमूल का कहना है कि उनका लक्ष्य उपभोक्ताओं को शुद्ध और सस्ता दूध उपलब्ध कराना है। अगर टैक्स दरें स्थिर रहती हैं तो आने वाले समय में और राहत मिल सकती है।