Old Pension Yojana: देशभर के सरकारी कर्मचारियों के मन में एक ही सवाल घूम रहा है कि आखिर पुरानी पेंशन योजना कब वापस मिलेगी। अब इस मुद्दे पर बड़ा कदम उठाते हुए आल इंडिया एनपीएस इंप्लाइज फेडरेशन ने 9 नवंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर बड़ा आंदोलन करने का ऐलान किया है। इस आंदोलन में लाखों कर्मचारी शामिल होंगे जो नई पेंशन योजना की जगह पुरानी योजना की बहाली की मांग कर रहे हैं।
पुरानी पेंशन योजना क्या है?
पुरानी पेंशन योजना यानी ओल्ड पेंशन स्कीम वह व्यवस्था थी जिसमें सरकारी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद आजीवन पेंशन मिलती थी। यह योजना साल 2004 से पहले लागू थी। इसमें कर्मचारियों को हर महीने उनकी आखिरी तनख्वाह का 50 प्रतिशत पेंशन के रूप में दिया जाता था। लेकिन 2004 के बाद सरकार ने नई पेंशन योजना यानी एनपीएस लागू कर दी जिसमें पेंशन का पैसा बाजार निवेश से जुड़ गया। अब कर्मचारियों को तय रकम नहीं बल्कि निवेश पर आधारित राशि मिलती है जिससे कई लोग असंतुष्ट हैं।
नई पेंशन योजना से क्यों नाखुश हैं कर्मचारी
कर्मचारियों का कहना है कि नई पेंशन योजना में भविष्य को लेकर भरोसा नहीं रहता। एनपीएस बाजार के उतार चढ़ाव पर निर्भर है और रिटायरमेंट के बाद तय आमदनी की गारंटी नहीं देती। इसके चलते कई बार कर्मचारियों को उम्मीद से बहुत कम पेंशन मिलती है। इसी वजह से अब हर राज्य में पुरानी योजना की बहाली की मांग तेज हो रही है। खासकर शिक्षक, पुलिसकर्मी और सरकारी दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारी इसको लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं।
9 नवंबर को दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन
आल इंडिया एनपीएस इंप्लाइज फेडरेशन ने घोषणा की है कि 9 नवंबर को दिल्ली के जंतर मंतर पर एक विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इसमें देशभर के लाखों कर्मचारी हिस्सा लेंगे। फेडरेशन के नेताओं ने कहा है कि जब तक सरकार पुरानी पेंशन योजना लागू नहीं करती तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सिंचाई विभाग के उपाध्यक्ष सुंदर सिंह ने कहा कि यह सिर्फ पैसों का मुद्दा नहीं बल्कि कर्मचारियों के बुढ़ापे की सुरक्षा का सवाल है।
सरकार का रुख और कर्मचारियों की उम्मीद
केंद्र सरकार अभी नई पेंशन योजना को ही जारी रखे हुए है। हालांकि कई राज्य जैसे राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हिमाचल प्रदेश ने अपने कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना बहाल कर दी है। अब उम्मीद की जा रही है कि केंद्र सरकार भी जल्द इस दिशा में कोई ठोस फैसला ले सकती है। कर्मचारियों का कहना है कि जब दूसरे राज्य यह योजना दोबारा शुरू कर सकते हैं तो केंद्र सरकार क्यों नहीं।